बफर जोन क्षेत्र से तेजी से घट रही पशुधनो की संख्या किसानों का छीन रहा रोजगारआदि भारत। गोंदिया महाराष्ट्र

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नवेगांव-नागझिरा टायगर रिजर्व का विस्तार होने से जंगलांे से सटे अनेक गांव बफर जोन क्षेत्र में आ गए है। जंगल बफर जोन में चले जाने से पशुधनांे को चराने की जगह नहीं मिल रही है। जिस वजह से बफर जोन क्षेत्र में आने वाले गांवांे कें किसानों ने धीरे-धीरे पशु धन पालना बंद कर दिया है। अब पशुधनांे की संख्या इतनी कम हो गई है की किसानों का आर्थिक बजट गड़बड़ा गया है। 
बता दंे की नवेगांव-नागझिरा टायगर रिजर्व का विस्तारीकरण किए जाने से गोरेेगांव तहसील के 26 से अधिक गांव बफर जोन क्षेत्र में चले गए है। जिसमें गोरेगांव वन परिक्षेत्र के सोदलागोंदी, जांभुलपानी, गराडा, पिंडकेपार, रामाटोला, मलपुरी, बोडुंदा, आलेबेदर, आसलपाानी, निंबा, हलबीटोला, तिल्ली, पलखेडा, मुरदोली, तेलनखेडी, घुमर्रा, पालेवाडा, मुंडीपार, हिरापुर, बागडबंध, धानुटोला, लंेडेझरी, गिरोला आदि ग्रामों का समावेश है। यह सभी गांव जंगलांे से सटे होने से इन गांवांे के जंगल बफर जोन क्षेत्र मंे चले गए है। जिस वजह से पशुधनांे को चराने के लिए जगह कम पड़ रही है। इतना ही नहीं तो बाघ, तंेदुएं जैसे हिंसक प्राणियांे द्वारा पशुधनांे का शिकार किया जाता है। जिस वजह से किसान पशुधन पालने की बजाए बेच रहे हे। यही एक वजह है की बड़ी तेजी से पशुधनों की संख्या में कमी आई है। जबकि पशुधनांे से किसानो की आर्थिक उन्नती होने में मदद मिल रही थी। लेकिन चराने के लिए जगह कम होने से अब वे पशुधन को पालने में हिचकिचा रहे है। जिससे किसानों का आर्थिक बजट भी गड़बड़ा गया है।