मांग गारुड़ी बस्ती में उपजिलाधिकारी पहुंचे पालावरची शाला में, बच्चों को सुनाई शिक्षाप्रद कहानियां

      आदि भारत। गोंदिया महाराष्ट्र 
गोंदिया जिले में ऐसी भी एक शाला है, जिसे पालावरची शाला के नाम से पहचाना जाता है। इस शाला में मांग गारुड़ी घुमंतु परिवार के बच्चों को शिक्षा के मुख्य धारा में लाकर शिक्षा का पाठ पढ़ाया जाता है। इस स्कूल में गोंदिया के उपजिलाधिकारी मानसी पाटील व ज्योती कांबले पहुंच गए और घुमंतु विद्यार्थियों से रूबरू होकर शिक्षा का महत्व पटाने के लिए विद्यार्थियों को शिक्षाप्रद कहानियां सुनाकर उनके साथ संवाद साधा है। यह अविस्मरणीय पल घुमंतु विद्यार्थियों के लिए किसी अचंबे से कम नहीं था। विशेष उल्लेखनीय यह है कि दोनों उपजिलाधिकारी घुमंतु विद्यार्थियों के साथ इतने मसगुल हो गए थे कि उन्हे समय का पता ही नहीं चल सका और रात 10 बजे तक उनके साथ संवाद साधा और सभी विद्यार्थियों को 10 दिसंबर को जिलाधिकारी कार्यालय में आमंत्रित भी किया। 
बता दें कि कुछ ऐसा समाज होता है, जो शिक्षा से कोसो दूर होता है। सरकारी योजना के बाद भी उन्हे शिक्षा के मुख्य धारा में जोड़ने में सरकार असफल हो जाती है, लेकिन इसे सफल बनाने के लिए गोंदिया के प्रशांत बोरसे तथा उनकी पत्नी ने एक प्रेरणादायक प्रयास शुरू किया है, उन्होने घुमंतु विमुक्त कल्याण परिषद के माध्यम से गोंदिया में इन समाज के विद्यार्थियों के लिए कुडवा में पालावरची शाला नामक स्कूल शुरू की है, जहां पर विभिन्न क्षेत्र के घुमंतु विद्यार्थी शिक्षा का पाठ पढ़ रहे है। यहां तक कि बारसे दंपत्ती ने उनके अधिकार व न्याय दिलाने के लिए दस्तावेज भी उपलब्ध कराने में कठीन परिश्रम किया है। आज यह पालावरची शाला पुरे विदर्भ में चर्चा में है। शनिवार को जिलाधिकारी कार्यालय के उपजिलाधिकारी मानसी पाटील व ज्योती कांबले मांग गारूडी की बस्ती में संचालित पालावरची शाला में पहुंच गए और बच्चों के साथ रूबरू होकर उन्हे शिक्षाप्रद कहानियां सुनाकर शिक्षा का महत्व पटाया। यहां तक की उपजिलाधिकारी कांबले व पाटील ने अपने जीवन में किस तरह से कठिनाईयां आई है और उन कठिनाईयों को शिक्षा के माध्यम से हल किया है इसके अनेक उदाहरण विद्यार्थियों को देकर संवाद साधा है। इतना ही नहीं तो छात्राओं को पीरियड्स तथा गुड टच, बैड टच के संदर्भ में ब्लैक बोर्ड पर चित्र उखेरकर बड़े संवेदनशीलता से समझाया गया। उपजिलाधिकारी अपनों के बीच आने से यह पल उन विद्यार्थियों के लिए किसी अविस्मरणीय पल से कम नहीं था। उपजिलाधिकारी मानसी पाटील व ज्योती कांबले इतने उनसे मसगुल हो गए कि वे रात 10 बजे तक उनके साथ रहे और उन्होने 10 दिसंबर को सभी विद्यार्थियों को अपने जिलाधिकारी कार्यालय में खास आमंत्रित किया है।