आदि भारत। गोंदिया (महाराष्ट्र)
मैं श्रीरामपुर बोल रहा हूं मेरा पूरा नाम श्रीरामपुर गोरेगांव जिला गोंदिया होकर मेरा पुराना नाम आकोटोला, सोनारटोला, भगतटोला है । लेकिन मेरा स्थानांतरण गोरेगांव में होने से शासन ने मेरा नाम श्रीरामपुर रखा है। मैं बहुत ही जर्जर अवस्था में पहुंच चुका हूं। मेरी आवाज न शासन सुन रहा है ना ही कोई जनप्रतिनिधि। अब मुझे इतनी असहनीय पीड़ा हो रही है कि, आप खुद आकर इस बस्ती में महसूस कर सकते हो।
कलपाथरी मध्यम प्रकल्प में भगतटोला, सोनारटोला व आकोटोला ग्रामों की जमीन संपादित की गई। वर्ष 2002 में गोरेगांव में श्रीरामपुर नामक पुर्नवसन बस्ती का निर्माण किया गया। लेकिन इस बस्ती के निवासी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे है। सडके पंगडंडी में तब्दील हो गई है, नालियाें का निर्माण हुआ था लेकिन देखरेख के अभाव में जमीन में दफन हो गई। हमेशा पीने के पानी की समस्या बनी रहती है। फिर भी यहां के श्रीरामवासी मजबुरी में अपना जीवन जी रहे है।
बता दे कि, गोरेगांव तहसील में कलपाथरी मध्यम प्रकल्प का निर्माण किया गया है। जहां पर 11 ग्रामों की सैकड़ो हेक्टर जमीन जिनमे से 3 गांव संपादित किये गये है। जिसमें भगतटोला, सोनारटोला व आकोटोला । ग्रामीणों के मकान और जमीन चले जाने से वे शत-प्रतिशत भुमिहीन हो गए है। शासन ने उनके निवास की व्यवस्था गोरेगांव में कर श्रीरामपुर नामक पुर्नवसन बस्ती का निर्माण 2002 में किया। जहां पर लगभग 800 पुर्नवसित नागरिक निवास कर रहे है। शासन ने बुनियादी सुविधा के नाम पर मकान, सड़क, पानी व बिजली की व्यवस्था की है, लेकिन इस बुनियादी व्यवस्था को ग्रहण लग गया है। बताया गया है कि, एक बार सड़क बनाई गई उसके बाद उसकी मरम्मत नहीं की गई। बारिश के पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं होने से हमेशा यह बस्ती बारिश के दौरान पानी से लबालब हो जाती है। पिने के पानी की सुविधाजनक सुविधा उपलब्ध नहीं किये जाने के कारण हमेशा ग्रामवासियों को टैंकर के माध्यम से पानी की व्यवस्था कराई जाती है। क्योंकि इस पुर्नवसन बस्ती में जलापूर्ति की पाईप लाईन अभी तक नहीं पहुँची। हालांकि वर्तमान में जलापूर्ति का काम शुरू है । बाजार के लिए मैदान तैयार किया गया है, लेकिन गड्ढो में तब्दील हो गया है, जिस कारण मैदान के गड्ढो में पानी भरा रहता है और वहां पर मवेशी का अड्डा बना रहता है। इस तरह से यह बस्ती बुनियादी सुविधा के लिए पिछले कई वर्षों से तरस रही है, इसके बावजुद भी इस ओर प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है।
*15 परिवारों को नहीं मिला जमीन का अधिकार*